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Apnabollywood.in : पीहू मूवी रिव्यू : एक 2 साल की बच्ची की कहानी

पीहू मूवी रिव्यू : एक 2 साल की बच्ची की कहानी

फिल्म का नाम : पीहू

डायरेक्टर: विनोद कापड़ी

स्टार कास्ट: मायरा विश्वकर्मा (पीहू)

अवधि: 1 घंटा 32 मिनट

सर्टिफिकेट: U

रेटिंग: 3 स्टार

क्या है फिल्म की कहानी?

पीहू मूवी एक थ्रिलर कहानी है. इस फिल्म की कहानी दिल्ली से सटे एनसीआर के एक घर की है, जहां बेटी का जन्मदिन मनाने के ठीक बाद मां का देहांत हो जाता है. फिल्म की इकलौती किरदार पीहू (मायरा विश्वकर्मा) एक रात पहले ही दो साल की हुई है। दूसरे दिन सुबह उठती है, तो अपनी मां (प्रेरणा शर्मा) को बिस्तर पर सोया पाती है, जिसने असल में नींद की गोलियां खाकर अपनी जान दे दी है। एक  2 साल की बच्ची घर में बिल्कुल अकेली हो, तो उसका अपना ही घर उसके लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इसका रोंगटे खड़े करने वाला सिनेमाई चित्रण है फिल्म ‘पीहू’। विनोद कापड़ी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘पीहू’ इसी सेंट्रल आइडिया पर बुनी गई है कि अगर एक छोटा बच्चा घर में अकेला रह जाए, तो वह क्या-क्या कर सकता है और उसके साथ क्या-क्या हो सकता है।

ऐसे में, घर में अकेली मासूम पीहू कभी फोन की घंटी बजने पर मोढ़े पर चढ़कर उसे उतारने की कोशिश करती है, तो कभी भूख लगने पर ओवन का स्विच ऑन करके और गैस जलाकर रोटी गरम करती है। कभी फ्रिज का सामान निकालकर खुद उसमें बंद हो जाती है, तो कभी गुड़िया गिर जाने पर बालकनी की रेलिंग पर चढ़ जाती है। कुल मिलाकर 92 मिनट की इस फिल्म के दौरान वह ऐसे-ऐसे खतरों से गुजरती है कि आप सिहर उठते हैं। कुछ दिनों पहले राजकुमार राव ने फिल्म ‘ट्रैप्ड’ में ऐसे ही अकेले फंसे व्यक्ति की भूमिका में खूब वाहवाही बटोरी थी, लेकिन वहां व्यस्क राजकुमार जानते थे कि वह मुश्किल में फंस चुके हैं, जबकि यहां मासूम पीहू को पता ही नहीं कि वह किसी मुश्किल में है। अंततः क्या होता है, इसका पता लगाने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

क्यों देखें फिल्म?

फिल्म की कहानी असल घटनाओं पर आधारित है, जिसे दर्शाने का ढंग काफी दिलचस्प है. सबसे बड़ी बात है कि फिल्म देखते वक्त आप पूरे समय पीहू की सहायता करते हुए उसके साथ लगे होते हैं. कई बार इमोशनल पल आते हैं. कहानी आगे बढ़ती जाती है. फिल्म में ऐसे कई सीक्वेंस हैं जब आप दिल थाम के बैठ जाते हैं कि कहीं कोई हादसा ना हो जाए. एक बार पीहू गैस पर रोटी गर्म करने जाती है, तो कई बार लोग दरवाजे पर दस्तक देते हैं पर वो दरवाजा खोल पाने में असमर्थ रहती है. एक ही किरदार को लगभग 91 मिनट तक भुना पाने की कला के लिए विनोद बधाई के पात्र हैं.

पीहू का किरदार निभा रही मायरा विश्वकर्मा ने बेहतरीन और उम्दा अभिनय किया है. पीहू पूरी तरह से बांधे रखती है. यह एक ऐसी कहानी है, जिसकी कल्पना मात्र से आप भयभीत हो जाएंगे. एक बड़ा घर, जिसके भीतर 2 साल की बच्ची, अपनी मृत मां के साथ है. वो अलग-अलग क्रिया-कलापों को अंजाम दे रही है. ऐसी लड़की, जिसे किसी भी चीज का संज्ञान नहीं है. एक घर में बंद हो जाने के बाद वहां से निकल पाने की कहानी कुछ समय पहले विक्रमादित्य मोटवानी ने ‘ट्रैप्ड’ में दर्शाई थी, जिसमेंराजकुमार राव ने काम किया था. इस फिल्म में विनोद कापड़ी ने 2 साल की बच्ची से वैसा ही काम करवा लिया है .

फिल्म का बजट 1 करोड़ से कम है. इसे कई फिल्म फेस्टिवल्स में सराहा भी गया है. इसे रॉनी स्क्रूवाला और सिद्धार्थ रॉय कपूर जैसे प्रोड्यूसर्स का बैक अप भी मिला हुआ है. फिल्म की रिलीज अच्छी होगी और थिएटर के साथ-साथ टीवी पर भी काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा. बजट की रिकवरी आसानी से हो जाएगी.

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