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मूवी रिव्यु : शाहिद कपूर की मूवी “बत्ती गुल मीटर चालू” स्लो और बोरिंग है

Shahid Kapoor

मूवी रिव्यु : शाहिद कपूर की मूवी “बत्ती गुल मीटर चालू” स्लो और बोरिंग है

 रेटिंग 3/5
 स्टार कास्ट Shahid Kapoor, श्रद्धा कपूर, दिव्येन्दु शर्मा, यामी गौतम
 डायरेक्टर श्री नारायण सिंह
 प्रोड्यूसर भूषण कुमार, कृष्ण कुमार,नितिन चन्द्रचूड़,कुसुम अरोरा, निशांत पिट्टी
 संगीतकार अनु मलिक, रोचक कोहली
 गीतकार सिद्धार्थ-गरिमा, मनोज मुंतशिर
 गायक  राहत फ़तेह अली खान,अरिजीत सिंह, आतिफ असलम, मीका सिंह,प्रकृति कक्कड़,नक्श अजीज
 जॉनर सोशल ड्रामा

 

डायरेक्टर श्री नारायण सिंह की Movie “बत्ती गुल मीटर चालू” सिनेमाघरो में आ चुकी है इस Movie का लोग काफी समय से इंतजार कर रहे थे इस Movie में श्री नारायण सिंह ने एक प्रासंगिक मुद्दे को उठाया है। जो की बिजली समस्या पर आधारित है उत्तराखंड के छोटे से टिहरी गांव पर आधारित है आज भी हमारे देश में  बुनियादी सुविधाओं की कमी आधे से ज्यादा भाग को परेशान कर रही है और भ्रष्टाचार और उदासीनता इसे और भी ज्यादा बुरा बना रही है। इस Movie में Shahid Kapoor (सुशील कुमार पंत ) इसी गांव के निवासी का रोल कर रहे है वही श्रद्धा कपूर (ललिता ) भी इसी गांव कि निवासी है जो एक साधारण परिवार में रहती है और यामी ने इस मूवी में एक वकील का रोल अदा किया है

कहानी :- 

इस Movie की कहानी हिटरी गांव में जो बिजली की समस्या है उस पर आधारित है  इस Movie में दिखाया गया है की किस तरह इस गांव की बिजली झप झप करके बंद हो जाती है इस गांव में बिजली कम आती है और बिल ज्यादा इस Movie में तीन दोस्त हैं। ललिता (श्रृद्धा कपूर), सुंदर त्रिपाठी (दिव्येन्दु शर्मा), सुशील उर्फ (Shahid Kapoor) उत्तराखंड के छोटे कस्बे में रहते हैं। ललिता फैशन डिजाइनर है। सुंदर का खुद का बिजनेस है और एस के एक चालू किस्म का वकील है जो गलत तरीके से पैसा कमाता है। तीनों दोस्त एक-दूसरे के बेहद करीब हैं और ज्यादातर समय साथ ही बिताते हैं। इस Movie में टर्निंग पॉइंट तब आता है जब Shahid Kapoor के दोस्त की फैक्ट्री का झूठा बिल 54 लाख का आ जाता है और  और इस समस्या पर कोई सुनवाई नहीं होती है और Shahid Kapoor का दोस्त आत्महत्या कर लेता है इस बात से Shahid Kapoor को काफी सदमा लगता है और फिर Shahid Kapoor पुरे सिस्टम से लड़ने की ठान लेते हे यही से Movie दिलचस्प मोड़ ले लेती है

Movie का उद्देश्य सही है यह Movie 2 घंटे 55 मिनट की है जो काफी स्लो और बोरिंग है। इस Movie की एडिटिंग खुद डायरेक्टर ने की है इसलिए Movie के फ्लो में काफी कमियां है। Movie काफी लंबी बन गई है। कहानी को एक घंटा ज्यादा खींचा गया है।

डायरेक्शन :-

शुरूआत में तीनो दोस्तों  को देखना अच्छा लगता है लेकिन थोड़ी देर के बाद Movie बोरिंग लगने लगती है क्योंकि कहानी में हर छोटी-छोटी चीजों को इतना एक्सप्लेन किया है कि दर्शक परेशान हो जाते हैं। कल्पना करने के लिए कुछ भी नहीं छोड़ा जाता। Movie का स्क्रीनप्ले विपुल के रावल, सिद्धार्थ सिंह और गरिमा वहाल ने लिखा है। Movie में उत्तराखंड की लोकल लैंग्वेज के शब्दों को यूज बहुत ज्यादा किया गया है जो कि हजम नहीं होता।

Movie देखें या नहीं :-

अगर आप रियल मुद्दे पर Movie देखना चाहते है तो यह Movie जरूर देखे । Movie निर्माताओं का इरादा नेक है लेकिन सही प्रेजेंटेशन के अभाव में उतनी प्रभावी नहीं है जितनी इसे होना चाहिए था।

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